White hair is wisdom and spiritual maturity not old age. सफेद बाल का मतलब बुद्धिमत्ता और परिपक्वता है, बुढ़ापा नहीं।
पिछले एक डेढ़ हफ्ते से मेरी Facebook की news-feed सिर्फ श्रीदेवी और उनकी अकस्मात निधन की खबरों से भरी हुई है। सारे न्यूज़ चैनल सिर्फ़ उनके अकस्मात निधन से जुड़ी खबरों को ही दिखा रहे हैं। श्रीदेवी जो लाखों दिलों की धड़कन थी अचानक ही heart failure से दुबई में उनका निधन हो गया। यह बहुत ही दुखद घटना थी। उनके सारे विश्व भर के fans अबतक शोक में हैं।
कुछ न्यूज़ चैनल कहते हैं कि उनका निधन heart attack की वजह से हुआ, कुछ कहते हैं कि उनका निधन बहुत सारी प्लास्टिक सर्जरी करवाने की वजह से हुआ, कुछ कहते हैं कि वह depression की patient थी और उसी की pills के overdose की वजह से उन्होंने अपनी जान गवाई। अलग-अलग लोग अलग-अलग न्यूज़ चैनल अलग अलग तरह की अटकलें लगा रहे हैं। हालांकि इस दुखद समय में हमें उनकी आत्मा की शांति की कामना करनी चाहिए और भगवान से दुआ करनी चाहिए कि वह दुख में डूबे परिवार को इस मुश्किल वक्त में संभलने की शक्ति दे।
इन्हीं में से एक अटकल ने मेरा ध्यान खींचा फिल्म जगत की उस नकली और दिखावे की दुनिया की ओर जहां कलाकार अपने fans की नज़रों में हमेशा बने रहने चाहते हैं और जब ऐसा नही होता तो वो टूट जाते हैं। चाहे बात Micheal Jackson की हो, परवीन बॉबी, सिल्क स्मिता, कुलजीत रंधावा, मीना कुमारी, नामों की list बहुत लंबी है।
फ़िल्म जगत के कलाकार लोग की नज़रों में बने रहने के लिए वह हर संभव प्रयास करते हैं जिस से वो जवान बने रहें। उनकी सोच सिर्फ इतनी है कि लोग सिर्फ उनको तब तक प्यार करेंगे जब तक वो जवान दिखेंगे।
अपने शरीर को फिट रखने के लिए ताकि वो बुढ़ापे से दूरी बनाए रखें है, वे बहुत कुछ करते हैं जैसे gym, dieting आदि।
सारे artist वजन बढ़ने से, झुर्रियों से, सफेद बालों के नाम से ही घबराते हैं। इन्हीं सब प्रकार के डर की वजह से वह कई रातें सो नहीं पाते और यह सारी चिंताएं आखिरकार उनको प्लास्टिक सर्जन के पास ले जाती हैं और यह तनाव उनको इतना अंधा बना देता है कि उनको अपनी सारी चिंताओं के जवाब बोटॉक्स, प्लास्टिक सर्जरी और इंप्लांट्स में नजर आते हैं ।
हमारे शरीर , प्रकृति की तरह ही है । जब कभी इंसान पर्यावरण पर हावी होता है तब तब प्रकृति पलट कर हमें जवाब जरूर देती है। आये दिन होने वाले disasters इस बात का सबूत हैं। यह सोचने वाली बात है कि जब हमारा शरीर किसी भी तनाव से, भावनाओं की उथल पुथल से होने वाले nervous breakdown को भी संभाल नही सकता तो बोटॉक्स, implants आदि जैसी दखल को कैसे सह सकता है।
फिल्म आर्टिस्ट्स हर वक्त इस डर में जिंदा रहते हैं कि जब वह बुड्ढे हो जाएंगे तो दुनिया की नजरों में टिक नहीं पाएंगे। वह कभी समझ ही नहीं पाते कि यह सफलता , ये चमक बहुत छोटे समय के लिए होती है और ऐसा उनके साथ नहीं, दुनिया में हर किसी के साथ होता है । वह कभी यह सच्चाई को समझ ही नहीं पाते 1 दिन सबको जाना होता है । वो हर वक्त अपने आप को बूढ़े होने से रोकने के लिए और जवान टिके रहने की कोशिश में प्रयासरत रहते हैं । काश वह अपने साथियों के अंतिम समय से ही सीख ले लेते और समझ पाते कि घड़ी की सुइयां कभी भी उल्टी नहीं चलती।
चाहे वह हॉलीवुड हो या बॉलीवुड सभी सितारे अपनी lifestyle को अपडेटेड रखना चाहते हैं ताकि वह लोगों की नजरों में बने रहे। इस तरह की lifestyle उनको अंधा कर देती है और वो यह सोच नहीं पाते कि अपनी नाक को ठीक करने और अपनी होठों की बनावट को सही बनाने के चक्कर में जिन दरवाजो को वो खटखटा रहे हैं वो सिर्फ उनको प्रकृति से गद्दारी करने पर मजबूर कर रहे है । वो अपने सफेद बालों को समझदारी का ख़िताब न समझ उसे बुढ़ापे का नाम देते रहते हैं और अपनी खूबसूरत जिंदगी को खराब कर देते है ।
यह जिंदगी बुरी हो या अच्छी जैसी भी हो लेकिन एक बात सच है कि यह ज़िन्दगी है बहुत छोटी इसीलिए जैसा कि English में कहते हैं- enjoy before it melts away.
अपने looks को बदलने की जगह अपनी सोच बदलिए।
Surgery से चेहरे कई चमक को बढ़ाने की जगह खुशी से चमकिये।
बुढ़ापे की सोच की जगह lifestyle को बदलिए।
Face uplifting की जगह खुद पे confidence को lift करिये।


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