Hello friends,
Life में सब कुछ और जल्दी-जल्दी पा लेने की इच्छा लगभग हम सभी की होती हैं, सभी अच्छा पैसा कमाना चाहते हैं, बड़ा घर, बड़ी car, सारी सुख सुविधायें, दुनिया घूमना चाहते हैं, जानते तो सभी ने है कि यह ज़िन्दगी खत्म हो जाती हैं लेकिन इंसान की इच्छाएं ख़त्म नहीं होती, एक चीज मिल जाती हैं तो हमारा मन दूसरी की इच्छा करने लगता हैं, ये भी चाहिए और वो भी, बस इन सभी को प्राप्त करने में ही हमारी जिंदगी बीत जाती है।
Life की इन्ही सारी सुख सुविधाओं की भागमभाग में हमें दिन के 24 घंटे भी कम पड़ने लगते हैं।
तो आईये खुद से कुछ सवाल पूछें?
क्या हमें इच्छाएँ नहीं रखनी चाहिए?
क्या इच्छा रखना गलत हैं?
क्या इन इच्छाओं को सच में बदलना की कोशिश करना गलत हैं,
क्या इच्छा रखना गलत हैं?
क्या इन इच्छाओं को सच में बदलना की कोशिश करना गलत हैं,
आप सभी का जवाब होगा, बिल्कुल नहीं, आप में से कुछ सोच रहे होंगे कि बिना इच्छाओं के जीवन भी कोई जीवन है?
लेकिन…
केवल अपनी इच्छाओं की पूर्ति करने की जद्दोजहत में, जीवन की अन्य कुछ अहम बातों को भूल जाना भी ठीक नहीं हैं। हुम् ये तो जानते ही हैं कि समय लौट कर नहीं आता, किसी के लिए भी और किसी भी कीमत पर नहीं, ऐसे में आप अभी जिन बातों को बेकार समझ कर ऐसे ही जाने दे रहो हो, भविष्य में हो सकता है आप पछताओ और सोचो कि काश बीत हुआ काल वापस आ जाए और आप उन सब बातों का, सभी चीजों और पलों का आनंद ले पाओ। लेकिन समय न मुड़ कर आता है ना ही किसी के लिए रुकता है।
मेरी कही इन सभी बातों को एक खूबसूरत कहानी के जरिये समझने की कोशिश करते हैं।
Philosophy की एक class चल रही थी। teacher ने class में आते ही अपने साथ लाये काँच के एक जार को टेबल पर रखा और उसमें टेबल टेनिस की balls डालने लगे और तब तक डालते रहे, जब तक कि उसमें एक भी और ball की जगह नहीं बची।
फिर उन्होंने students से पूछा – क्या जार पूरा भर गया?
फिर उन्होंने students से पूछा – क्या जार पूरा भर गया?
जवाब आया हाँ...
फ़िर teacher ने छोटे-छोटे पत्थर उसमें भरने शुरु किये, फिर धीरे-धीरे जार को हिलाया तो काफ़ी सारे पत्थर उसमें जहां जहां जगह खाली थी, समा गये, फ़िर से teacher ने पूछा -- क्या जार भर गया..?
Students ने एक बार फिर से बोला-- हाँ , जार भर गया हैं।
अब इस बार teacher ने रेत की एक बैग उठायी और उस से उस बरनी में रेत डालना शुरु किया, वह रेत भी उस जार में जहां जगह थी समा गई।
फ़िर से teacher ने पूछा, क्यों अब तो यह जार पूरी भर गई हैं ना?
हाँ.. अब तो पूरी भर गई है.. सभी ने एक साथ कहा।
Teacher ने अब चाय के दो कप मंगवा कर उसमें भरी चाय जार में डाली, चाय भी रेत के बीच स्थित थोडी़ सी जगह में सोख ली गई।
इस जार को हमें अपना जीवन समझना है।
टेबल टेनिस बॉल्स हैं most important part of life अर्थात परिवार, बच्चे, मित्र, स्वास्थ्य, पैसा, अन्य शौक आदि।
छोटे पत्थर हैं तुम्हारी नौकरी, कार, बडा़ मकान आदि।
और रेत है और भी छोटी-छोटी बेकार सी बातें, मनमुटाव, झगडे़ इत्यादि।
छोटे पत्थर हैं तुम्हारी नौकरी, कार, बडा़ मकान आदि।
और रेत है और भी छोटी-छोटी बेकार सी बातें, मनमुटाव, झगडे़ इत्यादि।
अब यदि तुमने जार में सबसे पहले रेत भरी होती तो balls और पत्थरों के लिये जगह ही नहीं बचती या पत्थर भर दिये होते तो balls नहीं भर पाते, रेत जरूर आ सकती थी।
ठीक यही बात जीवन पर लागू होती है।
यदि तुम छोटी-छोटी बातों के पीछे पडे़ रहोगे और अपनी energy उसमें नष्ट करोगे तो तुम्हारे पास मुख्य बातों के लिये अधिक समय और energy दोनो नहीं बचेगी।
सुखी जीवन के लिये क्या जरूरी है ये तो हमको ही तय करना होता है।
तो आज ही से अपने बच्चों के साथ खेलो, बगीचे में पानी डालो, कोई नया शौक पालो, सुबह सैर पे जाओ, घर के बेकार अनुपयोगी सामान को बाहर निकाल फ़ेंको, मेडिकल चेक – अप करवाओ, योग अभ्यास करो, हर छोटी सफलता की खुशी मनाओ, त्योहारो को दिल से जिओ आदि आदि।
तो आज ही से अपने बच्चों के साथ खेलो, बगीचे में पानी डालो, कोई नया शौक पालो, सुबह सैर पे जाओ, घर के बेकार अनुपयोगी सामान को बाहर निकाल फ़ेंको, मेडिकल चेक – अप करवाओ, योग अभ्यास करो, हर छोटी सफलता की खुशी मनाओ, त्योहारो को दिल से जिओ आदि आदि।
आप मे से कुछ जो ध्यान से पढ़ रहे हैं जरूर सोच रहे होंगे कि कहानी अभी पूरी नही हुई।
तो students अब teacher की बातों को बडे़ ध्यान से सुन रहे थे। तभी एक ने पूछा, लेकिन आपने यह नहीं बताया कि “चाय के दो कप” क्या हैं?
तो students अब teacher की बातों को बडे़ ध्यान से सुन रहे थे। तभी एक ने पूछा, लेकिन आपने यह नहीं बताया कि “चाय के दो कप” क्या हैं?
टीचर ने कहा ..मैं सोच ही रहा था कि अभी तक ये सवाल किसी ने क्यों नहीं किया।
इसका जवाब यह है कि जीवन हमें कितना ही परिपूर्ण,संतुष्ट या perfect क्यों न लगने लगे, लेकिन अपने खास मित्र या जीवनसाथी या उस एक खास इंसान के साथ दो कप चाय पीने की जगह और समय हमेशा होना चाहिये।
आप भी याद रखें हमारा लक्ष्य वो टेनिस की balls हैं और रेत, वो बातों जिनका कोई औचित्य नहीं वो कहीं भी समा जाएंगी।
आप भी याद रखें हमारा लक्ष्य वो टेनिस की balls हैं और रेत, वो बातों जिनका कोई औचित्य नहीं वो कहीं भी समा जाएंगी।
तो खुश रहिये और खुश रहते हुए अपना ध्यान tennis की balls यानी लक्ष्य पे रखिये और हां, दो पल चाय के लिए भी निकालिएगा जरूर।
—
—



Comments
Post a Comment